Friday, March 25, 2011

ऊधमपुर के गर्भ में छिपी है अमूल्य धरोहर


कभी मुलतान शहर के नाम से प्रसिद्ध रहे सलमेड़ी से दो किलोमीटर दूर बेली गांव के भू-गर्भ में अमूल्य धरोहर का स्वर्ग छिपा है। गांव में नवपाषण, हड़प्पा, कुषाण, मौर्य व गुप्तकाल से मिलती-जुलती सभ्यता के प्रमाण मिले हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में यह बर्बादी की ओर अग्रसर है। अवशेष देखकर लगता है कि यहां पर मिट्टी के बर्तन, हथियार, उपकरण व अन्य कलाकृतियों का कारोबार होता था। बेली गांव महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र व संपन्न शहर रहा होगा। ऊधमपुर शहर से 12 किमी. दूर प्रसिद्ध क्रिमची मंदिर को संरक्षित करने के लिए तो कदम उठा लिए गए, लेकिन बाकी जगह कोई प्रयास नहीं हुआ। बेली व इसके साथ लगते लांसी व डबरेह गांव में चार सौ कनाल भूमि पर बर्तन, खिलौने, उपकरण, सिक्के व जीर्ण-शीर्ण मंदिर मौजूद हैं। बेली गांव में स्थित एक एतिहासिक महत्व वाला मंदिर मिट्टी के टिल्ले पर स्थित है जिसका मुख पूर्व की ओर है। इसका दरवाजा पत्थर के स्लैब का बना हुआ है, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह खंडहर बन रहा है। ग्रामीण इस मंदिर के पत्थर निकालकर ले जा रहे हैं। आठवीं व नौवीं शताब्दी में इसी तरह के बने मंदिर कई स्थानों पर स्थित हैं। मंदिर से एक किमी. दूर स्थित बावली में पत्थर की बनी गणेश व नाग देवता की मूर्ति है। इन गांवों में लाल, काली व भूरी मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा के बर्तन, पत्थर व लोहे के बर्तन, हथियार व हथियार बनाने के लिए प्रयोग किया जाना वाला पत्थर का धारदार उपकरण, तांबा व चांदी के सिक्के और अन्य कलाकृतियां तथा खिलौने मिले हैं। जिले के इतिहास, धरोहर व संस्कृति पर काम करने वाले अनिल पाबा का कहना है कि क्ति्रमची मंदिर कन्नौज से कश्मीर का पुराना मार्ग है। इसका वर्णन अलबरुनी ने भी किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में उन्हें जानकारी मिली थी कि बेली गांव में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में एक प्राचीन मंदिर है, जिसे देखने के लिए वह जब वहां गए तो उन्हें मिट्टी के कई बर्तन मिले। यहां से प्राप्त बर्तन, हथियार, माप-तौल में प्रयोग किए जाने वाले पत्थर व अन्य कलाकृति, आयरन स्लैग, बालों में लगाने वाले पिन से यह पता चलता है कि यह गांव प्राचीन काल में एक अहम व्यावसायिक केंद्र व संपन्न शहर रहा होगा। उन्होंने बताया कि वे जम्मू यूनिवर्सिटी के साथ-साथ भोपाल विवि, कलकता विवि, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर सहित कई स्थानों पर सेमिनार व प्रदर्शनी के माध्यम से बेली गांव के रहस्य को उजागर कर चुके हैं। इसके बावजूद पुरातत्व विभाग की ओर से इसे बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। इस बारे में बात करने पर आर्कियोलॉजी, आर्काइक एवं म्यूजियम विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीरजादा मोहम्मद अशरफ के अनुसार शीघ्र ही एक टीम बेली गांव में जाकर स्थिति का जायजा लेगी। उनके अनुसार स्टेट प्रोटेक्टेड साइट के लिए कुछ नियम हैं यदि उस पर यह इलाका खरा उतरेगा तो इसके लिए कार्रवाई की जाएगी।


No comments:

Post a Comment