स्मारकों और संग्राहलयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों का बनाने की दिशा में उन्हें डिसेबल्ड फ्रेंडली बनाया जाएगा। इसके तहत सबसे पहले दिल्ली के स्मारकों और संग्राहलयों को नेत्रहीनों के लिए सुगम बनाने के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि अभी सांची के स्तूप और सारनाथ संग्राहलय डिसेबल्ड फ्रेंडली हैं लेकिन अब देश भर के सभी मुख्य स्मारकों को विकलांगों के लिए सुगम बनाने की कवाद शुरू की जाएगी। मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस द्वारा इस प्रोजेक्ट को फंड मुहैय्या कराने की भी संभावना है। भारतीय पुरातत्व सव्रेक्षण (एएसआई) दिल्ली के स्मारकों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत स्मारकों और संग्राहलयों में ब्रेल लिप में बोर्ड, स्पर्शनीय मानचित्र, ऑडियो गाइड ऐसे काम हैं जो स्मारकों में किए जाएंगे। स्मारकों को नेत्रहीनों के लिए ब्रेल लिपि के बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही ब्रेल लिपि में उनके लिए गाइड मैप भी होगा ताकि वे समझ सकें कि कहां क्या है। इसके लिए एएसआई देश भर के विभिन्न सर्कल्स में कार्य शुरू करेगा लेकिन सबसे पहले यह काम दिल्ली में शुरू किया जाएगा। दिल्ली में लाल किला, हुमायूं का मकबरा, कुतुबमीनार, सफदरजंग का मकबरा और पुराना किला ऐसे स्मारक हैं जहां से इस योजना को शुरू किया जा सकता है। इस काम में एएसआई देहरादून के नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ विजुअली हेंडीकेप्ड की भी मदद लेगा। साइनेज व बोर्ड बनाने में संस्थान की मदद ली जाएगी। साथ ही विशेषज्ञों की भी राय ली जाएगी ताकि स्मारकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा सके। साथ ही नक्शे और एग्जीबिटर स्पर्शनीय लगाए जाएंगे। प्रमुख स्मारकों में ऑडियो गाइड की सुविधा भी इस दिशा में एक अहम कदम होगा। इससे नेत्रहीनों के लिए स्मारक और संग्राहलय घूमना और उनके विषय में जानकारी प्राप्त करना बेहद आसान हो जाएगा। ऐसा होने से विदेशों के नेत्रहीन पर्यटक भी इसका भरपूर लाभ उठा सकेंगे और विदेशों में संदेश जाएगा कि भारत के संग्राहलय और स्मारक डिसेबल्ड फ्रेंडली हैं। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। एएसआई के आला अधिकारियों का मानना है कि इस कार्य के लिए फंड कोई मुद्दा नहीं है। मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस इस प्रोजेक्ट को आर्थिक सहायता देने के लिए दिलचस्पी दिखा चुका है। यदि इस प्रोजेक्ट को दिल्ली में कामयाबी मिल जाती है तो इसे देश के अन्य प्रमुख स्मारकों में भी शुरू किया जाएगा।
Friday, March 4, 2011
डिसेबल्ड फ्रेंडली होंगे स्मारक
स्मारकों और संग्राहलयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों का बनाने की दिशा में उन्हें डिसेबल्ड फ्रेंडली बनाया जाएगा। इसके तहत सबसे पहले दिल्ली के स्मारकों और संग्राहलयों को नेत्रहीनों के लिए सुगम बनाने के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि अभी सांची के स्तूप और सारनाथ संग्राहलय डिसेबल्ड फ्रेंडली हैं लेकिन अब देश भर के सभी मुख्य स्मारकों को विकलांगों के लिए सुगम बनाने की कवाद शुरू की जाएगी। मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस द्वारा इस प्रोजेक्ट को फंड मुहैय्या कराने की भी संभावना है। भारतीय पुरातत्व सव्रेक्षण (एएसआई) दिल्ली के स्मारकों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत स्मारकों और संग्राहलयों में ब्रेल लिप में बोर्ड, स्पर्शनीय मानचित्र, ऑडियो गाइड ऐसे काम हैं जो स्मारकों में किए जाएंगे। स्मारकों को नेत्रहीनों के लिए ब्रेल लिपि के बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही ब्रेल लिपि में उनके लिए गाइड मैप भी होगा ताकि वे समझ सकें कि कहां क्या है। इसके लिए एएसआई देश भर के विभिन्न सर्कल्स में कार्य शुरू करेगा लेकिन सबसे पहले यह काम दिल्ली में शुरू किया जाएगा। दिल्ली में लाल किला, हुमायूं का मकबरा, कुतुबमीनार, सफदरजंग का मकबरा और पुराना किला ऐसे स्मारक हैं जहां से इस योजना को शुरू किया जा सकता है। इस काम में एएसआई देहरादून के नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ विजुअली हेंडीकेप्ड की भी मदद लेगा। साइनेज व बोर्ड बनाने में संस्थान की मदद ली जाएगी। साथ ही विशेषज्ञों की भी राय ली जाएगी ताकि स्मारकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा सके। साथ ही नक्शे और एग्जीबिटर स्पर्शनीय लगाए जाएंगे। प्रमुख स्मारकों में ऑडियो गाइड की सुविधा भी इस दिशा में एक अहम कदम होगा। इससे नेत्रहीनों के लिए स्मारक और संग्राहलय घूमना और उनके विषय में जानकारी प्राप्त करना बेहद आसान हो जाएगा। ऐसा होने से विदेशों के नेत्रहीन पर्यटक भी इसका भरपूर लाभ उठा सकेंगे और विदेशों में संदेश जाएगा कि भारत के संग्राहलय और स्मारक डिसेबल्ड फ्रेंडली हैं। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। एएसआई के आला अधिकारियों का मानना है कि इस कार्य के लिए फंड कोई मुद्दा नहीं है। मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस इस प्रोजेक्ट को आर्थिक सहायता देने के लिए दिलचस्पी दिखा चुका है। यदि इस प्रोजेक्ट को दिल्ली में कामयाबी मिल जाती है तो इसे देश के अन्य प्रमुख स्मारकों में भी शुरू किया जाएगा।
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