Monday, April 18, 2011

पिकासो के अमूर्त शैली के चित्रों में भावनाएं


क्यूबिज्म और मॉडर्न आर्ट विधा का चित्रकला जगत में एक खास स्थान है और इन दोनों ही विधाओं को स्थापित करने का श्रेय एक ही चित्रकार यानी पाब्लो पिकासो को जाता है। वह ऐसे चित्रकार थे, जिन्होंने न सिर्फ सामयिक घटनाओं को अपने चित्रों में बयां किया, बल्कि एक ऐसी अमूर्त शैली विकसित की, जिसमें भावनाएं तलाशी जा सकती थीं। 'क्यूबिज्म' फ्रांस में वर्ष 1907 में शुरू हुआ था और इस शैली के तहत पिकासो के त्रिआयामी चित्रों ने खासी लोकप्रियता बटोरी। पिकासो की गणना ऐसे चित्रकारों में भी होती है जिन्होंने अपने इर्दगिर्द हो रहे सामयिक घटनाक्र मों जैसे स्पेन के गृह युद्ध और द्वितीय विश्वयुद्ध को भी अपने चित्रों में उकेरा। मध्य प्रदेश के जाने-माने चित्रकार जफर मोहम्मद बताते हैं कि मॉडर्न आर्ट शैली के तहत इन दिनों जिस तरह की अमूर्त शैली के चित्र बनाये जाते हैं, उनकी नींव एक तरह से पिकासो ने ही रखी थी। लेकिन उनकी चित्रकारी और अब की चित्रकारी में खासा फर्क है। उन्होंने कहा कि इन दिनों आड़ी-टेढ़ी लकीरों और रंगों के सम्मिशण्रको भी अमूर्त शैली के चित्रों में गिना जाता है लेकिन पिकासो ने एक अलग ही तरह की अमूर्त शैली के चित्र उकेरे जिनमें भावनाएं अभिव्यक्त रहती थीं और आप उन्हें तलाश सकते थे। युवा चित्रकार बताते हैं कि पिकासो के साथ एक दिलचस्प वाकया भी जुड़ा है। पिकासो ने स्पेन के गृह युद्ध के दौरान जर्मनी द्वारा बरसाये गए बमों के बाद के हालात को बयां करती एक पेंटिंग 'गुरनिका' बनाई थी जो उनकी सर्वाधिक प्रशंसनीय कलाकृतियों में है। मोहम्मद के अनुसार, कहा जाता है कि फ्रांस में एक बार हिटलर एक प्रदर्शनी देखने पहुंचे जिसमें 'गुरनिका' को रखा गया था और वहां पिकासो भी मौजूद थे। कलाकृति पर नजरें टिकने पर हिटलर ने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि यह चित्र किसने बनाया है। इस पर पीछे खड़े पिकासो ने कटाक्ष किया कि इस चित्र के असली रचयिता तो वह (हिटलर) ही हैं। कै िर के च्ा र आर्टिस्ट इरशाद कप्तान बताते हैं कि इन दिनों जो युवा मॉडर्न आर्ट और अमूर्त शैली की चित्रकारी सीख रहे हैं, उसकी बुनियाद पिकासो के चित्रों में ही मिलती है। उन्होंने कहा कि उनके चित्र हमारे लिए धरोहर की तरह हैं। उन्होंने अपने रचनाकाल में जितनी कलाकृतियां दीं, वे खजाने के रूप में इस दुनिया में हमेशा याद की जाएंगी। उनके 'क्यूबिज्म' और लाल तथा नीले रंग के चित्रों को दुनिया भर में आज भी सराहा जाता है। वेबसाइट 'आर्ट फैक्ट्स' ने बिक्री के लिहाज से वर्ष 2010 के शीर्ष चित्रकारों में पिकासो को दूसरे क्र म पर रखा है। पिकासो की कलाकृति 'गारकन ए ला पाइप' ने तब सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये जब उसकी वर्ष 2004 में 10.4 करोड़ डॉलर में नीलामी हुई। स्पेन में 25 अक्तूबर 1881 को जन्मे पिकासो का चित्रकला की ओर रुझान बचपन से ही था। उन्होंने बार्सिलोना के कैफे में किशोरवय की उम्र से ही जाना शुरू कर दिया जहां बुद्धिजीवी जुटा करते थे। वह वर्ष 1900 के बाद पेरिस आ गए और उन्होंने मानेट, गुस्ताव कोरबेट और तोलुस लॉट्रेक की कलाकृतियों पर गौर करना शुरू किया। 'क्यूबिज्म' की शुरुआत से पहले पिकासो ने निराश्रितों और वेश्याओं के चरित्रों को कलाकृतियों में नीले रंग से रंगना शुरू किया जिसे 'ब्लू पीरियड' कहा गया। इसके बाद उन्होंने हल्के नीले, गुलाबी और लाल रंगों से चित्रकारी शुरू की जिसे पिकासो के कला जीवन का 'पिंक पीरियड' कहा गया। पिकासो के 'क्यूबिज्म' शैली के चित्रों ने खासी लोकप्रियता बटोरी जिसमें उन्होंने त्रि-आयामी आकार में मानव चरित्रों को उकेरना शुरू किया। इसकी लोकप्रियता इस हद तक थी कि फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और अमेरिकी चित्रकारों ने भी तेजी से 'क्यूबिज्म' को अपनाना शुरू कर दिया। स्पेन में 1937 में जब गृह युद्ध शुरू हुआ तो पिकासो फ्रांस में रहते थे और उन्होंने अपनी जन्मभूमि पर हो रहे रक्तपात को अपने चित्रों में उकेरना शुरू किया। वह 1944 में कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए और उन्होंने कोरियाई युद्ध में अमेरिका के दखल देने के विरोध में कलाकृतियां बनायीं। आठ अप्रैल 1973 को फ्रांस में ही उनका 91 वर्ष की उम्र में निधन हुआ।पिकासो की कलाकृतियां बिक्री में मामले में आज भी सबसे आगे रहती हैं। बताया जाता है कि उनकी 500 से अधिक बेमिसाल कलाकृतियां उनके निधन के बाद लापता हो गई।

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