जम्मू जम्मू कश्मीर के गांदरबल जिले की कंगन तहसील में स्थित राष्ट्रीय धरोहर नारान नाग मंदिरों की भूमि पर माफियाओं ने कब्जा जमा रखा है। हालांकि संपत्ति की रक्षा का जिम्मा संभालने वाले विभाग के अधिकारियों ने काफी खत-ओ-किताबत की लेकिन कब्जे अभी तक बरकरार हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने सूचना अधिकार कानून के तहत एपीएमसीसी (ऑल पार्टी माइग्रेंट्स कोऑर्डिनेशन कमेटी) को यह जानकारी मुहैया कराई है। एपीएमसीसी ने 13 दिसंबर 2010 को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक को पत्र लिखकर राष्ट्रीय धरोहर के साथ लगती भूमि की जानकारी मांगी थी। महानिदेशक के निर्देश पर विभाग के राज्य सर्कल ने 10 जनवरी 2011 को दिए जवाब में कहा है कि नारान नाग मंदिर की भूमि पर हनीफ कलाश, अब्दुल रशीद अक्रम, शौकत अहमद जागल, मोहम्मद डार और राज्य के पीडब्ल्यूडी विभाग ने कब्जा कर रखा है। इसे हटाने को जम्मू कश्मीर क्षेत्र के आर्कियोलोजिस्ट के डिप्टी सुपरिंटेंडिंग ने सरकार को कई बार अवगत करवाया। वहीं,एपीएमसीसी के नेताओं का आरोप है कि यह कब्जा पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के कर्मियों की मिलीभगत से किया गया है। संगठन के महासचिव अरून कांदरू ने कहा कि मंदिर में पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों की चौबीस घंटे मौजूदगी के बावजूद कब्जा कैसे संभव है। संगठन के नेताओं ने मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का फैसला किया है ताकि राज्य सरकार पर वादी में मंदिरों के संरक्षण के लिए कश्मीरी हिंदू मंदिर बिल पारित करवाने का दबाव बन सके। उल्लेखनीय है कि कश्मीर के राजा ललितादित्य ने हजारों वर्ष पहले नारान नाग के मंदिरों का निर्माण कराया था। 1958 में सरकार ने इन मंदिरों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया। इससे पहले भी घाटी में पंडितों की संपत्तियों, मंदिरों व धार्मिक स्थलों के साथ लगती भूमि पर अवैध कब्जों को एपीएमसीसी नेताओं द्वारा सरकार के संज्ञान में लाया गया है। इनमें बाबा धर्मदास मंदिर, बरबरशाह सत्थू श्रीनगर, ज्वाला जी मंदिर ख्रीयु, श्रीनगर, शिव मंदिर सराय मेन मार्किट काजीगुंड, अनंतनाग के वनपू गांव में स्थित मंदिर की भूमि, लव-कुश मंदिर कुहरामा, श्मशान भूमि फतेहपुरा, सागाम गांव की श्मशान भूमि प्रमुख है।
No comments:
Post a Comment